गर तुम आते
ठहर हुआ ये मौसम
बदल जाता
गर तुम आते॥
इस ठूंठ पर
कोंपल आता
गर तुम आते॥
जब से गए तुम
जीवन ठहर
गया है
रातें नहीं गुजरतीं
दिन भी पसर गया है ।
चाँद को मिलती गति
सूरज भी दौड़ जाता
गर तुम आते ।
इस ठूंठ पर
कोंपल आता
गर तुम आते...
बदल जाता
गर तुम आते॥
इस ठूंठ पर
कोंपल आता
गर तुम आते॥
जब से गए तुम
जीवन ठहर
गया है
रातें नहीं गुजरतीं
दिन भी पसर गया है ।
चाँद को मिलती गति
सूरज भी दौड़ जाता
गर तुम आते ।
इस ठूंठ पर
कोंपल आता
गर तुम आते...
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