यहीं तो था कभी मैं
इन्हीं खेतों पगडंडियों और बांधों के बीच..
नीले अम्बर और हरी धारा के बीच ..
जहाँ सूरज निकलता था और
शाम होती थी...
बाबा का स्नेह और माँ की ममता होती थी.....

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