मेरी कविता

औरत

जुल्म सहती है

चुप रहती है

तो सुंदर है...

जब बोल पड़ती है

बगावत करती है

तो बेगैरत है

क्योंकि वो एक औरत है...!

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तन थिरकते हैं पर मन नहीं

युद्ध नहीं, प्रेम की तलाश