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बिहार में बाढ़

लगभग आधा बिहार जलमग्न हो गया है । भिन्न -भिन्न न्यूज़ चॅनल , तरह -तरह के कैप्शन के साथ पूरी दुनिया में बाढ़ को दिखा रहे हैं । बहुत ही बूरा मंजर है । चरों तरफ़ पानी ही पानी , लोग बेबस हैं। मैं सोचने लगता हूँ - कौन है इस जानलेवा आपदा का जिम्मेवार ? प्रकृति या सरकार ? मैं सरकार को कटघरे में खड़े करने से नही रोक पा रहा हूँ। जानकारी मिली है कि लोग कोसी के साथ जीने के आदि हो छिके थे ..फ़िर सरकार ने कोसी को बाँध क्यों ?और जब बाँध तोह सालों-साल उसकी मरम्मत क्यों नहीं की ?...वो कहते हैं न की घमंड तो बड़े-बड़ों का भी नही रहता , फ़िर ये सरकार क्या चीज़ है ..
क्या हुआ जो नही चल सके तुम
आप और मैं

पाखी

ये कहानी है उस लड़की की जिसका नाम है पाखी। पाखी जब १५ साल की थी तब एक लड़के ने उसके साथ बलात्कार किया था । उस वक्त पाखी ने आत्मा हत्या करने की कोशिश की थी और ऊँचाई से कूद पड़ी थी..जिसकी वजह से उसकी आंखों की रौशनी चली गई थी..
कच्ची दीवार पर लकड़ी के टुकड़े से लिखा था प्यार ! सावन आया प्यार तो क्या दीवार ही न रही ...

कुछ यहाँ कुछ वहां

कुछ यहाँ कुछ वहां छुट गया हूँ जहाँ तहां जाने कहाँ कहाँ ! कुछ माँ की गोद में कुछ बाबा के कन्धों पर ...... कुछ तितलियों के पीछे कुछ गांव की गलियों के मोड़ पर कुछ स्कूल के रास्ते में उस खिड़की पर जहाँ खड़ी मिलती थी एक लड़की अपनी दोनों चोटियों में लाल फीते का फूल बनाये और नज़र मिलते ही मारे शरम के बन्द कर लेती थी खिड़की आज भी देख रहा हूँ उस खिड़की के खुलने की राह.... और वो पतंग जो पतंगों के झूंड में सबसे ऊपर उड़ रही है बहुत ऊपर विल्कुल चान्द के करीब चान्द जैसी... मेरी नज़रें अब भी वही अटकी हैं .... जो हमारे रास्ते को करती थी छोटा और आसान उन पगडंडियों की चिकनी मिट्टी पर मेरे पैरों के निशान आज भी मिल जायेंगे..... ओह ये मौसम मौसम का बदलना मौसम के खेल बसंत सावन शरद सावन के मेघ वसंत के रंग शरद की गुनगुनी धूप ले गये सब ज़रा-ज़रा सा....
ये रास्ते हैं प्यार के ...........